चल पड़ा अंजनी सी एक राह पर , मंज़िल की तलाश में
चलते हुए पहुंचा अब एक चौक पर ,
देखता हूँ हर ओर जाती हुई इस भीड़ को ,
कोई बाएं कोई दायें कोई मेरे सामने की राह पर,
तो कोई उस ओर ही मुड़ गया जिस ओर से मैं आया
बैठ कर यहाँ मैंने जब ज़रा सी साँस ली ,
तब समझ आया , ज़िन्दगी का कोई एक मुकाम नहीं
यह तो सफ़र है ,
हर चैराहे पर कोई एक मोड़ पकड़कर आगे बढ़ जाना है
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