कीमत

 ज़माना निकल गया दुनिया के बाज़ार में अपनी कीमत लगाते लगाते | 

बदलाव  होगा भी तो शायद बस ये कि 

आज हमारी कीमत लगायी जा रही है , कल शायद हम किसी और कि  लगाएं |


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